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देश के किसानों के सत्याग्रह ने दिखा दिया कि अन्याय के खिलाफ सच्चाई और मज़बूत इरादों की जीत ज़रूर होती है : केजरीवाल


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नई दिल्ली, 26 नवंबर (वेब वार्ता)। दिल्ली विधानसभा में सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीन काले कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन की जीत पर सभी देशवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मेरे देश के किसान ने अपने सत्याग्रह से यह दिखा दिया कि अन्याय के खिलाफ सच्चाई और मज़बूत इरादों की जीत ज़रूर होती है। दुनिया के इतिहास में यह सबसे लंबा आंदोलन रहा, जो देश के किसानों को अपनी ही चुनी हुई सरकार के खिलाफ करना पड़ा और 12 महीने तक चला। कभी सोचा नहीं था कि आजाद भारत में किसानों को राष्ट्र विरोधी, खालिस्तानी, चीन-पाकिस्तान के एजेंट समेत तमाम गंदी-गंदी गालियां दी जाएंगी। सीएम अरविंद केजरीवाल ने सवाल किया कहा कि अगर देश के सारे किसान राष्ट्र विरोधी हैं, तो जो गालियां दे रहे थे, वो क्या हैं? पिछले कुछ वर्षों से लोगों का जनतंत्र पर से भरोसा उठता जा रहा था। यह जनतंत्र की जीत है और इससे लोगों का जनतंत्र में भरोसा बढ़ा है। किसानों की एमएसपी समेत अन्य लंबित मांगों का हम पूरा समर्थन करते हैं और किसानों पर लगाए गए सभी झूठे मुकदमें को वापस लेने की मांग करते हैं।

दिल्ली विधानसभा की आज पुराना सचिवालय में एक दिवसीय बैठक संपन्न हुई। विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, कृषि मंत्री गोपाल राय, कैलाश गहलोत समेत दिल्ली सरकार के सभी मंत्री और विधायक मौजूद रहे। इस दौरान दिल्ली के शहरी विकास मंत्री गोपाल राय ने किसान आंदोलन की जीत को लेकर सदन में रखे गए संकल्प पत्र का प्रस्ताव रखा गया। सबसे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने संकल्प पत्र के प्रस्ताव को बहुमत के साथ पास कर दिया।

दिल्ली विधानसभा में सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज से एक साल पहले किसान आंदोलन शुरू हुआ था। केंद्र सरकार द्वारा बिना किसानों से पूछे, बिना जनता से पूछे अपने अहंकार में तीन काले कानून पास किया था। लोकसभा इनका बहुमत है और राज्यसभा में भी इनकी काफी सीटें हैं। उसका इन्हें अहंकार है कि हम तो कुछ भी पास करा लेंगे। उस अहंकार के चलते इन्होंने ये काले कानून पास किए। इनको लगता था कि किसाना आएंगे, थोड़े दिन आंदोलन करेंगे, चीखेंगे, चिल्लाएंगे और फिर घर चले जाएंगे। पिछले साल 26 नवंबर को दिल्ली के बॉर्डर पर यह आंदोलन शुरू हुआ। आज पूरा एक साल हो गया और उनका आंदोलन सफल रहा। सबसे पहले मैं इस देश के किसानों को तहे दिल से बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं। इस आंदोलन में सब लोग शामिल हुए। कोई प्रत्यक्ष रूप से कोई अपने-अपने घर से दुआएं भेज रहे थे। जो भी इस देश का भला चाहते हैं, सबने इस आंदोलन का समर्थन किया। महिलाओं, व्यापारियों, छात्रों, पत्रकारों, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों के साथ सभी धर्म-जाति के लोगों ने इसका समर्थन किया और सबने इसकी सफलता के लिए दुआएं दी। मैं सभी देश वासियों को इसकी सफलता पर बधाई देना चाहता हूं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन में पंजाब के किसानों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि मैं खासकर पंजाब के किसानों को बधाई देना चाहता हूं, क्योंकि उन लोगों ने इस पूरे आंदोलन की अगुआई की। जिस तरह बहुत बड़े स्तर पर ट्रैक्टर ट्रॉली पंजाब से आए और यहां आकर बैठ गए। पंजाब की उन महिलाओं को भी मैं बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर कई दिनों तक इस आंदोलन में बॉर्डर पर उनके साथ बैठी हुई थी। सर्दी, गर्मी और बारिश में इनको कितनी बांधाएं आईं, इन्होंने कितनी तकलीफें सही। मुझे याद है कि पिछले साल जब कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी, तब हम सोचा करते थे कि हम अपने घर में इतने बड़े हिटर लगा कर बैठे हैं और रजाई के अंदर हैं। वहीं, किसान इतनी कड़ाके की सर्दी में खुले आसमान के नीचे पता नहीं कैसे बैठे होंगे, कैसे सो रहे होंगे। फिर गर्मी आई, डेंगू आया और कोरोना आया, लेकिन सारी बांधाओं को पार करते हुए आखिर में किसानों की जीत हुई और तीनों काले कानूनों को वापस लिया गया।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं समझता हूं कि शायद यह दुनिया के इतिहास में सबसे लंबा आंदोलन था। मैं और कोई ऐसा आंदोलन नहीं जानता। भारत में 1907 में एक आंदोलन हुआ था। वह पंजाब के किसानों का आंदोलन था और वह आंदोलन अंग्रेजों के खिलाफ हुआ था और करीब 9 महीने तक चला था। उसके बाद अब किसानों को अपनी चुनी हुई सरकार के खिलाफ आंदोलन करना पड़ा और यह 12 महीने तक चला। यह सबसे अहिंसात्मक आंदोलन रहा। संयमित आंदोलन था। सत्ता पक्ष ने किसानों को भड़काने, गालियां देने और षणयंत्र करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। किसानों के आंदोलन को कुचला गया। लखीमपुरी खीरी की घटना बहुत ही दर्दनाक घटना है। सरेआम सड़क के उपर हजारों लोगों के सामने किसानों को गाड़ी से कुचल दिया गया, इतनी हिम्मत हो गई थी। अगर सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करता तो जिसने कुचला था, उसको गिरफ्तार भी नहीं किया जाता। यह तो सुप्रीम कोर्ट की वजह से इन्हें गिरफ्तार करना पड़ा। लेकिन किसान बेचारा केवल शांत रहा और अर्जुन की तरह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहा। इस दौरान अपने ही देश में अपनी ही चुनी हुई सरकार के खिलाफ लड़ते-लड़ते 700 किसान शहीद हो गए। उन सभी किसानों को मैं नमन करता हूं, लेकिन एक खुशी की बात यह है कि अब उनकी आत्मा को शांति मिल रही होगी, क्योंकि उन्होंने जिस चीज के लिए सहादत दी, वह लक्ष्य अंत में पूरा हुआ और किसानों की जीत हुई।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरवाल ने कहा कि किसानों को कितनी गालियां दी गई। उन्हें राष्ट्र विरोधी कहा गया। अगर अपने देश के सारे किसान राष्ट्र विरोधी हैं, तो जो गालियां दे रहे थे, फिर वो क्या हैं? क्या वो राष्ट्रवादी हैं। किसान राष्ट्र विरोधी हैं, खालिस्तानी हैं, चीन के एजेंट हैं, पाकिस्तान के एजेंट हैं समेत किसानों को तमाम गालियां न दी गईं। कभी सोचा नहीं था कि आजाद भारत में एक ऐसा दिन आएगा, जब अपने किसानों को इतनी गंदी-गंदी गालियां दी जाएंगी। लेकिन किसानों ने पलट कर इनका जवाब नहीं दिया। किसान शांति से बैठे रहे। इनके साथ इतनी हिंसा की गई। इनके उपर काफी वाटर कैनन बरसाए गए। लेकिन इनकी के सामने सरकारों के वाटर कैनन का पानी सूख गया। सड़क के उपर कीलें ठोंकी गईं। लेकिन किसानों की हिम्मत के सामने सरकार की कीलें भी पिघल गईं। बैरियर लगाने समेत सब कुछ किया गया, लेकिन सरकार किसानों की हिम्मत नहीं तोड़ पाई और आखिर में सरकार को किसानों के आगे झुकना पड़ता। इन किसानों ने केंद्र सरकार के अहंकार को तोड़ दिया। जिस तरह से आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी, यह किसान आंदोलन भी आजादी की लड़ाई से कम नहीं था। सबसे बड़ी बात यह हुई कि यह सिर्फ किसानों की जीत नहीं है, यह जनतंत्र की जीत है। भारत की जीत है। इस देश के अंदर पिछले कुछ वर्षों से लोगों का जनतंत्र के उपर से भरोसा उठता जा रहा था कि इस देश के अंदर तो कुछ चलता ही नहीं है। इनकी बहुमत आ गई, तो ये कुछ भी कर लेते हैं। किसी के खिलाफ रेड मारते हैं, लोगों को तंग करते हैं। देश के अंदर अब जनतंत्र तो बची ही नहीं है। इसलिए यह जनतंत्र की जीत हुई है और लोगों का जनतंत्र में बहुत ज्यादा भरोसा बढ़ा है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह एक तरह से हवन था और उस हवन में हम सब लोगों ने भी अपनी तरफ से एक चम्मच घी डाला, जब हमारे पास फाइल आई कि पंजाब से किसान आ रहे हैं। पंजाब से चल पड़े हैं और बॉर्डर पर आ रहे हैं। उन किसानों के लिए स्टेडियम को जेल बनाया जाएगा। तब मुझे अन्ना आंदोलन के अपने दिन याद आ गए। उस समय हमको भी जेल में रखा गया था। इन्हीं स्टेडियम के अंदर हम भी रहे हैं और हमने भी इन स्टेडियम के अंदर रातें काटी हैं। मैं समझ गया कि ये सभी किसानों को इन स्टेडियम के अंदर डाल देंगे और आंदोलन खत्म हो जाएगा। फिर किसान स्टेडियम में बैठे रहें, जितने दिन बैठना है। हमने स्टेडियम को जेल बनाने की अपनी मंजूरी नहीं दी। इसके लिए केंद्र सरकार बहुत नाराज हुई। वैसे ही ये हमें बहुत तंग करते हैं। मैंने सोचा थोड़ा और तंग कर लेंगे। बॉर्डर के उपर किसानों को जब-जब पानी, टॉयलेट आदि जरूरत पड़ी, हमने हर समय मदद की। हमारे तरफ से जो भी हो सकता था, हमने किसानों की मदद की।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि बेशर्मी की भी हद होती है। जब ये तीन काले कानून लाए गए, तब भाजपा वाले चारों तरफ बोले, वाह! क्या मास्टर स्ट्रोक है और जब ये तीनो काले कानून वापस लिए गए, तब भी बोले, वाह! क्या मास्टर स्ट्रोक है, क्या गत बना दी है, भाजपा वालों की उनके नेताओं ने। मैं यही कह सकता हूं कि मुझे भाजपा वालों पर बहुत दया आती है। किसानों की लंबित मांगों का हम पूरा समर्थन करते हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को तत्काल मंत्री मंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए। मुझे नहीं पता कि केंद्र सरकार को क्या मजबूरी है। उनकी कुछ तो मजबूरी होगी ही, जो एक आदमी का बोझ लेकर केंद्र सरकार अपने कंधे पर ढो रही है। मुझे नहीं पता है कि उनकी क्या मजबूरी है, लेकिन कुछ तो जरूर मजबूरी होगी। पूरा देश मांग करता है कि ऐसे व्यक्ति को तुरंत बर्खास्त किया जाए। किसानों की एमएसपी की जो मांग है, वह बिल्कुल जायज है। हमने भी इस पर गहन अध्ययन किया है। अगर एमएसपी लागू हो जाता है, तो देश के कृषि सेक्टर को बहुत बड़ा फायदा होगा। किसानों पर जितने झूठे मामले लगाए गए हैं, वो सारे वापस लिए जाएं और जो 700 किसान शहीद हो गए हैं, उनको उचित मुआवजा दिया जाए। किसान तय करेंगे कि वो कब उठना चाहते हैं। किसान जब तक वहां बैठे हैं, हम पूरी तरह से किसानों के हर कदम के साथ हैं।

विधानसभा में किसान आन्दोलन की जीत पर किसानों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि किसानों ने आने वाली पीढ़ी के लिए एक उदाहरण रखा है कि किस प्रकार निरंकुश सत्ता के खिलाफ शांतिपूर्ण आन्दोलन कर अपनी बात मनवाई जा सकती है। किसानों ने यह सिद्ध कर दिया कि जब सत्ता में बैठे लोगों को अहंकार हो जाए और वो चंद लोगों के फायदे के लिए देश के आम आदमी को कुचलने का प्रयास करें, तो शांतिपूर्ण आन्दोलन के माध्यम से उस निरंकुश सत्ता को झुकाया जा सकता है।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि किसान आन्दोलन का एक साल देश के लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय बनकर आया है, जिसे हमें आगे आने वाली पीढ़ी को पढ़ाना चाहिए कि किस प्रकार तमाम आरोपों, अत्याचारों और षडयंत्रों के बावजूद किसानों ने धैर्य के साथ आन्दोलन चलाया और जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि आन्दोलन के दौरान किसानों की आवाज पूरे देश में फैली और थोड़े समय में ही पूरे देश के किसान एकजुट हो गए, लेकिन यह बेहद दुःख की बात है कि किसानों की बातों को प्रधानमंत्री तक पहुंचने में एक साल लग गया। इस दौरान किसानों को दिल्ली बॉर्डर पर रोका गया, केंद्र सरकार ने दिल्ली के स्टेडियमों को जेल में तब्दील करने की योजना बनाई, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किसानों के साथ खड़े रहे और उन्होंने दिल्ली के स्टेडियमों को जेल में तब्दील नहीं होने दिया।

डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि भारत के इतिहास में यह हमेशा याद किया जाएगा कि जब किसान शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे, तो सत्ता में बैठे प्रधानमंत्री एक साल तक उनकी बातों को अनसुना करते रहे। इस दौरान भाजपा के नेता और सत्ताधारी लोगों ने किसानों के आन्दोलन को विदेश समर्थित बताया, किसानों को आतंकवादी बोला। केंद्र सरकार ने किसान आन्दोलन को ख़त्म करने के लिए 100 करोड़ का बजट लगा दिया। राज्यसभा में जकार्ता में हुए विमान दुर्घटना को लेकर श्रद्धांजलि दी गई लेकिन अपने हक़ की लड़ाई लड़ते हुए शहीद हुए 700 किसानों की बात तक नहीं की गई।


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